Daaman – National Meet at Varanasi

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प्रेस विज्ञप्ति

 

देशभर के पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में मांगा पुरुषों के लिए बराबरी का हक

खुद को बताया समाज का विष पीने वाला नीलकंठ.

# प्रधान मन्त्री को ज्ञापन देकर उठायी पुरुष आयोग बनाने की मांग.

तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुरुष अधिकार अधिवेशन की झलकियां

• देशभर के 150 से अधिक पुरुष अधिकार कार्यकर्ता, अपने लिये अधिकारों की आवाज बुलंद करने तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु प्रधानमन्त्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एकत्र हुए.
• पुरुषों को समाज के जहर से बचाने के लिये खुद को नीलकण्ठ बनाया, समाज में पिता, भाइयों आदि को बेहतर भविष्य देने के लिये संघर्षरत. 
• पुरुषों के  पारिवारिक जीवन, वैवाहिक जीवन, उनको प्रभावित करते कानून, न्याय, स्वास्थ्य, प्रजनन, गोद लेने के कानून, संपत्ति अधिकारों, समाज एवं परिवारों में स्थान आदि विषयों पर हुई चर्चा 
• पुरुषों की दुश्वारियां और उनके दुख दर्द को उद्द्ध्वरित करके दुनिया को पुरुषों के लिए बेहतर बनाने की आवश्यकता
• वरिष्ठ पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा पुरुषों के लिए सहायता की व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया, जो कि अभी भारत में है ही नहीं 
• पुरुषों से संबंधित विषयों पर शोध एवं आंकड़ों की कमी को दूर करने के लिए छात्रवृत्ति दिए जाने की आवश्यकता 
• वैवाहिक जीवन को नष्ट करने के उद्देश्य से ’वैवाहिक बलात्कार कानून’ को पिछले दरवाजे से लाए जाने के प्रयासों पर जताई गहन चिंता
• पुरुष अधिकार संगठन पर देश का पहला डाक – टिकट जारी 
• ’पिशाचिनि मुक्ति पूजा’ आयोजित करके पुरुषों को, समाज को, सरकारों एवं न्याय व्यवस्था को महिलाओं के फ़र्जी – मुकदमों से बचाने की प्रार्थना की गयी  
• महिलाओं के फ़र्जी मुकदमों से जीवित बच सके कार्यकर्ताओं ने मणीकर्णिका घाट पर वैवाहिक सम्बन्धों का किया पिण्डदान
• प्रतिभा – खोज प्रतियोगिता के माध्यम से संवारे गये भविष्य के पुरुष अधिकार कार्यकर्ता
• चिकत्सकीय परिक्षण में आधे से अधिक कार्यकर्ता पाये गये अस्वस्थ 
• विजेताओं को पुरुस्कार एवं प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया 
• अगला राष्ट्रीय अधिवेशन नागपुर में व्यापक एवं वृह्द स्तर पर आयोजित करने के संकल्प के साथ समापन. 

पुरुषों के अधिकार एवं उनसे संबंधित विषयों पर दशम राष्ट्रीय अधिवेशन वाराणसी के होटल हिन्दुस्तान इन्टरनेशनल में दिनाक 11 – 13 अगस्त, 2018 के बीच आयोजित हुआ । ’पुरुषों के लिए नीलकंठ’ विषय पर यह अधिवेशन, सेव इंडियन फैमिली (SIF) के द्वारा आयोजित किया गया । यह संस्था भारत में पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं एवं उनकी संस्थाओं का सर्वोच्च संगठन है | इस दौरान पुरुषों के पारिवारिक एवं वैवाहिक जीवन, पुरुषों को प्रभावित करने वाले कानून, न्याय, स्वास्थ्य, प्रजनन, गोद लेने के अधिकार एवं संपत्ति अधिकार आदि विषयों पर चर्चा हुई । व्यवस्था के हाथों कठोरता से कुचले जाने पर एवं पुरुष अधिकारों के संबंध में सहृदयता के कारण यह कार्यकर्ता एवं उनके शुभेच्छु-गण एक मंच पर एकत्र हुए हैं | निजी दु:ख-दर्द से उबरने के बाद इन कार्यकर्ताओं ने मोर्चा लेने की ठानी और अपने अधिकारों को प्राप्त करने का प्रण किया | पुरुषों से संबंधित बहुत से महत्वपूर्ण बिंदु हमारे समाज में उपेक्षित रहते हैं | यह कुछ ऐसे विषय हैं जिन पर कहीं, किसी मंच पर, किसी प्रकार की कोई चर्चा नहीं होती है |

आयोजन सचिव अनुपम दुबे ने अधिवेशन की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुये बताया कि पुरुष अधिकार कार्यकर्ता नीलकंठ के समान है जो समाज का जहर पीकर, आने वाले समय में पुरुषों के लिए बेहतर समाज के निर्माण के लिए कार्यरत है | जिस प्रकार भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हुआ जहर पीकर दुनिया को उसके दुष्प्रभाव से बचाया था और स्वयं नीलकंठ कहलाए । उसी प्रकार पुरुष अधिकार कार्यकर्ता भी आज समाज में पुरुषों के विरुद्ध व्याप्त भ्रान्तियों एवं पूर्वाग्रहों का जहर पीकर, स्वयं को भस्म करके, आने वाले समय को पुरुषों के लिए एक बेहतर समाज बनाने के लिए कार्य करते हैं |

इस अवसर पर बोलते हुए सेव इंडियन फैमिली (SIF), के संस्थापक सदस्य निलाद्री दास ने समाज में पुरुषों की सहायता के लिए व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया | भारतीय समाज इस भ्रम में रहता है पुरुषों को सहायता की कोई आवश्यकता नहीं होती है | वह अपने जीवन की दुश्वारियों का सामना करने के लिए स्वयं सक्षम है | वास्तविकता में पुरुषों के ऊपर महिलाओं के द्वारा फर्जी मुकदमे की बाढ़ आ गई है । ऐसी दशा में बहुत से पुरुष एवं उनके परिवार अपने आप को एकतरफा कानूनों के मकड़जाल में फंसा हुआ पाते हैं | बलात्कार, दहेज-उत्पीड़न, छेड़छाड़ करना आदि तमाम प्रकार के फर्जी मुकदमे कुटिल महिलाओं के द्वारा अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए पुरुषों के ऊपर लिखा दिए जाते हैं | यद्यपि व्यवस्था एवं उसके अधिकारियों को जमीनी हकीकत का ज्ञान है पर फिर भी वे पुरुषों की मदद के लिए आगे नहीं आते | कानून की लंबी प्रक्रिया और अदालत की लड़ाई के कारण बहुत से पुरुष अपना समय, धन और स्वास्थ्य खोते जाते हैं | जबकि कुटिल महिलाएं, महिलाओं के लिए बनाए गए एकतरफा वैवाहिक कानूनों एवं अन्य दीवानी एवं फौजदारी कानूनों के पीछे छुप कर पुरुषों की संपत्ति को हड़पने तक का प्रयास करती हैं | “प्रेमी से मिलकर पति की हत्या” – रोज की खबर हो चुकी है। ऐसी दशा में पुरुषों से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने जीवन काल में ही अपनी वसीहत तैयार करके जाएं जिससे कि ऐसी महिलाओं को अपने मंसूबों में सफलता ना मिले |

वास्तव फाउंडेशन, मुंबई के संस्थापक अमित देशपांडे ने पुरुषों के संबंधित विषयों पर किसी प्रकार के शोध के ना होने पर चिंता जताई | यह जानकर आश्चर्य होगा कि सरकार के पास आधिकारिक रूप से पुरुषों के स्वास्थ्य, शिक्षा व उनकी आर्थिक स्थिति एवं उनसे जुड़े हुए किसी भी मसले पर, किसी प्रकार का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है | यहां तक कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे भी सिर्फ बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के संबंध में आंकड़े एकत्र करता है | यह किसी भी व्यक्ति के समझ से परे है कि क्यों पुरुषों को और उनकी समस्याओं को देश के आंकड़ों से भी बाहर रखा गया | अमित देशपांडे ने इस समस्या से पार पाने के लिए शोध के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया | उन्होंने अपनी संस्था द्वारा इस दिशा में पूर्व में किए गए कुछ अनुभवों को भी साझा किया | उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों में पुरुषों से संबंधित विषयों पर शोध को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जाना चाहिए |

मैन वेलफेयर ट्रस्ट वेलफेयर ट्रस्ट, दिल्ली के संस्थापक ट्रस्टी अमित लखानी ने वैवाहिक संबंधों में बलात्कार को फ़ौजदारी अपराध बनाने की दिशा में पिछले दरवाजे से किए जा रहे कुत्सित प्रयासों पर चिंता जताई | उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित एक याचिका का हवाला देते हुए बताया कि किस प्रकार उस याचिका में वादी के द्वारा फर्जी एवं मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर कोर्ट से अनुतोष की प्रार्थना की गई है | उनके ट्रस्ट द्वारा इस याचिका में हस्तक्षेप करके इसके निस्तारण से पूर्व न्यायालय को सही तथ्यों से एवं पुरुषों के पक्ष से भी अवगत कराया जा रहा है | उन्होंने कहा कि वैवाहिक बलात्कार कानून को चोरी-छुपे, चोर दरवाजे से लागू करके लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं | ऐसा किया जाना भारत में पारिवारिक व्यवस्था को छिन्न – भिन्न एवं पति-पत्नी के संबंध अदालतों के गलियारे में चक्कर लगाते हुए समाप्त हो जाएंगे | क्योंकि बंद दरवाजों के पीछे पति-पत्नी के बीच क्या घटित हुआ था इसको कोर्ट में साबित करना मुश्किल होगा और कानून महिलाओं के पक्ष में झुका होने के कारण, सिर्फ महिलाओं को सुनने के बाद पुरुषों को सजा दे देने की प्रवृत्ति जोर पकड़ेगी |

अधिवेशन के दूसरे दिन प्रतिभा-खोज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । इसके माधय्म से भविष्य के पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं में गुणों की पहचान करके उन्हे आन्दोलन की भविष्य की रणनीति के अनुरुप तैयार किया जायेगा । इस प्रतियोगिता में देश भर के तेरह प्रतिभागियों ने अपने कौशल दिखाये । “पुरुष अधिकारों की आवाज को समाज से जोड़कर सभी तक पहुंचाने”, विषय पर अपने प्रस्तुति पर सेव इण्डियन फ़ैमिली कर्नाटक के नितिन पी. कदम को विजेता घोषित किया गया । वास्तव फ़ाउण्देशन, मुम्बई के आनंद रामकुमार को उनकी प्रस्तुति “विषेश अवसरों पर आम जन मानस तक पहुंचने के तरीकों’ विषय पर उनकी प्रस्तुति के लिये दिव्तीय पुरुस्कार मिला । एस.आई.एफ़. – गुजरात के जयनाथ सिसोदिया को उनकी प्रस्तुति “महिलाओं के फ़र्जी मुकदमों से लड़ाई पुरुष अधिकार आन्दोलन नहीं है पर उसका एक भाग है”, के लिये तृतीय पुरुस्कार मिला ।

अधिवेशन में एकत्र पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं ने ‘पिशाचिनी मुक्ति पूजा’ का आयोजन किया | इस पूजा के माध्यम से ईश्वर से प्रार्थना की गई कि पुरुषों को कुटिल स्त्रियों के द्वारा दाखिल किए गए फर्जी मुकदमों से बचाया जा सके | साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि सरकार और न्याय व्यवस्था इन पिशाचिनियों के प्रभाव से बाहर आ सके जिससे कि इन लोगों की बुद्धि पर पड़ा हुआ पर्दा हटे और उनको पुरुषों का दु:ख-दर्द भी दिखाई पड़े । गौरतलब है कि बनारस में पिशाच मोचन मंदिर है परंतु कोई पिशाचिनी मोचन मंदिर नहीं है। यह भी एक प्रकार का लैंगिक भेदभाव ही है ।

देश के लिये वह एक गर्व का अवसर था जब पहली बार किसी पुरुष अधिकार संगठन पर डाक टिकट जारी किया गया । पांच रुपये के इस टिकट पर ’सेव इण्डियन फ़ैमिली आन्दोल” का प्रतीक चिन्ह मुद्रित है । हृदया – नेस्ट, बंगाल के वरिष्ठ कार्यकर्ता आमृत्य ताल्लुकेदार के प्रयासों से यह डाक टिकट अस्तित्व में आया । सेव इण्डियन फ़ैमिली, दिल्ली के वासिफ़ अली, वास्तव फाउडेशन, मुम्बई के अमित देशपाण्डे और दामन वेलफ़ेयर सोसाइटी, कानपुर के अनुपम दुबे से संयुक्त रूप से इस डाक टिकट को जारी किया ।

अधिवेशन के तीसरे दिन बनारस के मणिकणिका घाट पर वैवाहिक संबन्धों का अन्तिम संस्कार और पिण्ड दान आयोजित किया गया । इसके माध्यम से यह सन्देश दिया गया कि जीवन के कठिन समय को पार करने के बाद अब यहां एकत्र सभी पुरुष अपने कटु अनुभवों को भुलाकर आगे नये एवं स्वतंत्र जीवन की शुरुआत करेंगे । अधिवेशन के दौरान कार्यकर्ताओं के चिकित्सकीय परिक्षण में आधे से अधिक प्रतिभगियों को उच्च रक्तचाप से ग्रसित पाया गया । सभी प्रतिभागियों द्वारा प्रधानमन्त्री को सम्बोधित एक ज्ञापन भेजकर पुरुष आयोग गठन की मांग की गयी ।

आयोजन सचिव अनुपम दुबे ने बताया कि राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित कराने की पहल मात्र दस वर्ष ही पुरानी है । इतने कम समय में भी पुरुष अधिकार आन्दोलन काफ़ी तेजी से लोकप्रिय हुआ है जिसके कारण दो लाख से अधिक लोग इससे जुड़ चुके हैं । उन्होनें सेव इण्डियन फ़ैमिली की अखिल भारतीय पुरुष सहायता हेल्पलाइन नम्बर 8882 498 498 के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया । इस हेल्पलाइन पर फ़ोन करके पुरुष अपनी समस्याओं के समाधान हेतु से बात कर सकते हैं ।

कार्यक्रम के समापन के पर विजेताओं को पुरुस्कार वितरण एवं प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में आने वाले में मुख्यत: चेन्नई से सुरेश राम, औरंगाबाद से जयंत फ़ुलारे, कोलकता से अभय भारुन्त, पंजाब से रोहित डोगरा, त्रिपुरा से दिलीप सरकार, बरेली से डॉ वैभव गुप्ता, भोपाल से डॉ सुमंत मिश्रा, कानपुर से गौरव भट्टाचार्य, वाराणसी से के. के. रंजन, लखनऊ से यक्ष, गोड्डा से प्रदीप विद्यार्थी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता रहे | आश्चर्यजनक रूप से इस कार्यक्रम में महिलाओं के द्वारा भी पुरुषों के समर्थन में सहभागिता की गई । जिसमें लखनऊ से डॉक्टर इंदु सुभाष एवं सरिता सिंह एवं अहमदाबाद से कलावती पटेल आदि शामिल रहे | सभी कार्यकर्ता अगले राष्ट्रीय अधिवेशन को और वृहद स्तर पर नागपुर में आयोजित करने के संकल्प के साथ विदा हुए ।

सादर,
अनुपम दुबे
आयोजन सचिव

स्थान : वाराणसी
दिनांक : 27 अगस्त, 2018

नोट:
1. कार्यक्रम के कुछ फ़ोटो संलग्न हैं ।
2. इस कार्यक्रम को स्थानीय एवं राष्ट्रीय प्रेस द्वारा प्रमुखता से स्थान दिया गया । इस कार्यक्रम की खबर अंग्रेजी, कन्नड, तेलगू, बंगाली आदि भाषाओं में प्रकाशित हुई, जिसका की संकलन हमारी वेबपेज www.daaman.org/natcon18coverage पर उपलब्ध है ।
3. कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति, फोटो, वीडियो एवं अन्य जानकारी भी हमारी वेबसाइट www.daaman.org पर उपलब्ध है ।
4. किसी प्रकार अन्य जानकारी के लिए media@daaman.org पर ईमेल करें या +91-98891 88810 पर फोन करें |
5. सेव इंडियन फैमली आंदोलन के बारे में अधिक जानकारी हेतु www.SaveIndianFamily.in पर जाएं |