Samraat 01 – Andheri Gufa

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सम्राट

सम्राट एक बच्चे की कहानी है जो मुश्किल हालत मैं गुजर कर अपने एवं अपने लोगों के लिए एक शक्तिशाली एवं समृद्ध साम्राज्य की स्थापना करने मैं कामयाब हुआ | यह कहानी उन साँपों की भी है जिन्होंने नवरंग से सम्राट की यात्रा के विभिन्न पड़ावों मैं महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त किया | इस  कहानी का काल निर्धारण संभव नहीं क्योंकि उस समय काल की वैज्ञानिक गणना आरम्भ नहीं हो पायी थी

 

 

 अँधेरी गुफा

 

    बहुत बहुत समय पूर्व जब मनुष्य पूर्ण रूप से वैज्ञानिक नहीं था | उसके पास बहुत अधिक वैज्ञानिक उपकरण नहीं थे और ना ही मनुष्य ने बड़े बड़े साम्राज्य स्थापित किये थे | अभी तब मनुष्य सिर्फ छोटे छोटे समूहों मैं रहना ही सिख पाया था | समूहों के बीच आपसी संघर्ष एक सामान्य घटना थी | परिवार की स्थापना हो चुकी थी परन्तु परिवार का वर्तमान स्वरूप नहीं था | परिवार का उद्देश्य मात्र समूह को अगली पीढ़ी प्रदान करना एवं उसे पालन करके समूह के काबिल बनाने तक सीमित थे | परिवार के सदस्य किसी भी रूप मैं एक दूसरे पर निर्भर नहीं थे | समूह का मुख्य कार्य भोजन की व्यवस्था करना था और क्योंकि भोजन को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के साधन उपलब्ध नहीं थे इसीलिए यह लगातार किया जाने वाला कार्य था |

हिमालय ऊपरी हिस्सा जोकि बर्फ की वजह से हमेशा सफेद दिखाई देता था वहीं निचले हिस्से मैं जहां कुछ हरियाली दिखाई देती थी | इन दोनों के बीच एक ऐसा भू भाग भी था जो न तो बर्फीला था और न ही हरियाली से घिरा हुआ | इसी भू भाग मैं एक छोटा 9 या शायद 10 छोटी छोटी झोंपड़ियों का कबीला, इसी क़ाबिले मैं एक बच्चे का जन्म हुआ | संपूर्ण कबीले के लिए ख़ुशी का कारण क्योंकि  बचे के जन्म  का अर्थ था कबीले का विस्तार |

किसी समय उस बच्चे का जन्म बहुत महत्वपूर्ण था परन्तु आज कोई उसका नाम भी नहीं जानता परन्तु कबीले का नाम नवरंग था  | आगे चल कर बच्चा अपने कबीले के नाम से ही मशहूर हुआ इसीलिए हम उसे नवरंग ही कहेंगे |

वर्तमान मैं हो सकता है कबीले का अंश भी मौजूद नहीं हो परन्तु जब नवरंग कबीले मैं बड़ा हो रहा था उस  वक़्त वह एक बहुत ही खुबरात कबीला था | कबीले की उत्तरी दिशा मैं हिमालय की ऊँची एवं सफेद बर्फ से ढकी हुई चोटिया दिखाई देती थी वही दक्षिणी दिशा मैं ऐसी चोटियां देखी जा सकती थी जिन पर हरियाली का कब्ज़ा था | जहां एक तरफ अंतहीन सफेदी थी वही दूसरी तरफ अंतहीन हरियाली | और बीच का भुभाग ठीक वैसा जैसा की  कबीले के रहने के लिए चाहिए था |  प्रकृति ने जहाँ खूबसूरत नज़ारे पैदा किये वहीँ पर चुनौतियाँ भी पैदा की | उत्तरी दिशा मैं जहां अधिकांश समय बर्फ रहती थी वही कबीले को कुछ जड़ी बुटिया भी मिल जाती थी जिनका उपयोग कबीले वासियों ने दवाओं के रूप मैं करना सिख लिया था | दक्षिणी दिशा का जंगल बहुत घना था  आज तक कोई भी जंगल मैं दाखिल होने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था परन्तु फिर भी जंगल का शुरुआती भाग फल एवं अन्य खाद्य सामग्री से भरपूर था | कभी कभी शिकार भी मिल जाता था | कबीले के लोगों के लिए खाद्य सामग्री समस्या नहीं थी अपने पुरे जीवन काल मैं शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरा हो जब जंगल ने उनको निराश किया हो | वहीँ दूसरी तरफ बर्फ ही बर्फ जहां कभी कभार कुछ जड़ी बूटियां मिल सकती थी | एक तरफ दोस्ताना जंगल दूसरी तरफ निर्दयी बर्फ परन्तु कबीले की छोटी छोटी  झोंपड़ियां जंगल से दूर परन्तु बर्फ के नज़दीक बनी हुई थी  | कबीलेवासी जंगल से दूर रहना ही पसंद करते थे क्योंकि उनका विश्वास था की जंगल मैं भयानक जानवरों का निवास है | आज तक किसी ने भी भयानक जानवरों को नहीं देखा था उन्होंने सिर्फ छोटे छोटे जानवर ही देखे परन्तु पिछली कई पीढ़ियों से सुनाई जा रही कहानियों मैं उनको पूरा विश्वास था  और इसीलिए न केवल झोंपड़ियां जंगल से दूर बनायीं गयी थी बल्कि खाद्य सामग्री का भण्डारण भी जंगल से दूर ही किया जाता था |

अन्य दोनों दिशाएं मनुष्य के लिए निर्विघ्न थी | पश्चिमी दिशा मैं एक छोटी सी नदी थी जो बर्फ के नीचे से बहकर आती थी और जंगल मैं लुप्त हो जाती थी | यही नदी कबीले के लिए पीने का पानी उपलब्ध करवाती थी | हलाकि खेती व्यवस्थित नहीं थी परन्तु फिर भी नदी का पानी कभी कभार प्रयोग मैं आ जाता था | इस नदी मैं छोटे आकर की मछली भी दिखाई जा सकती थी | इतनी उपयोगिता के बावजूद भी नदी कबीले वासियों का मार्ग रोकने मैं समर्थ थे | उन्होंने कभी भी नदी को पार नहीं किया |

पूर्व की दिशा मैं जहां तक देखा जा सके पथरीला मैदान थे | कबीले के लोगों ने कई बार इस दिशा मैं दूर दूर तक जाकर देखा परन्तु उनको न तो अन्य कोई कबीला ही दिखाई दिया और न ही ऐसा कुछ जिसका इस्तेमाल किया जा सके | इसी कारण कबीलेवासी इस दिशा को व्यर्थ मानते थे |  परन्तु उनके किस्से कहानियों मैं उन मैदाओं का अंत एक बड़े कबीले पर होता था |

एक खूबसूरत दिन कबीले मैं एक बच्चे का जन्म  हुआ जिसे हम नवरंग के नाम से ही पुकारेंगे | जब नवरंग 10 साल का हुआ तब वह बहुत ही सामान्य बच्चा था परन्तु उसकी शारीरिक विकास अन्य बच्चों की तुलना मैं बहुत अच्छा था | उसके आस पास के 15 साल के बच्चे भी उसके सामने कमजोर दिखाई देते थे | उसकी इस शारीरिक क्षमता ने उसे अपने दोस्त बच्चों का नायक बना दिया था | हालांकि नवरंग का नायकत्व सिर्फ खेल कूद तक ही सीमित था अधिक से अधिक नदी से मछली पकड़ने या नदी मैं स्नान करने तक |  कोई नहीं जनता कब और कैसे नवरंग को नायक मान लिया गया | शायद ऐसा उस दिन हुआ जब एक बच्चे ने नदी मैं असामान्य रूप से बड़ी मछली पकड़ ली | जिसके बँटवारे को लेकर विवाद हुआ और विवाद को नवरंग के द्वारा सुलझाना गया | शायद उसी दिन से ही नवरंग नायक बन गया

वह गर्मी का सामान्य से अधिक गरम  दिन था | नदी मैं छोटी मछली का मिलना सामान्य था कुछ बड़े आकर की मछली का मिलना थोड़ा असामान्य था परन्तु नामुमकिन नहीं | परन्तु वह दिन शायद बहुत किस्मत वाला था जब एक बच्चे ने बहुत बड़े आकार की मछली को पकड़ने मैं कामयाबी हासिल की | परन्तु अकेले बच्चे के चंचल मछली को सम्हाल पाना आसान नहीं था इसीलिए अन्य बच्चों की मदद से ही मछली को पकड़ा जा सका | और इसी कारण विवाद भी पैदा हुआ | सामान्य  नियमों  के मुताबिक  मछली उस बच्चे की होनी चाहिए थी जिसने उसे पकड़ा | परन्तु यहां तो मछली पकड़ी सहयोग से गयी थी | ऐसे मैं मछली पर सब बच्चों का अधिकार था | विवाद पैदा हुआ जब 2 बच्चे बड़ा हिस्सा लेने पर अड़ गए क्योंकि उनके द्वारा किया गया सहयोग सबसे बड़ा था | समस्या का समाधान नवरंग के द्वारा दिया गया | समाधान न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता क्योंकि जो ज्यादा बड़े टुकड़े की डिमांड कर रहे थे उनको कुछ नहीं दिया गया परन्तु समाधान सबको मंजूर था क्योंकि नवरंग की शारीरिक क्षमता बच्चों मैं डर पैदा करती थी |

कई महीने गुजर चुके थे और हर नए दिन नवरंग का नायकत्व नए जोश के साथ उभर रहा था |

यह सर्दी का एक बहुत सर्द दिन था | जैसा की व्यवस्था थी बच्चे अँधेरा होने से पूर्व ही अपने कबीले मैं लौट आये थे आग जला कर खाना पकने की तैयारी हो रही थी पहाड़ की तरफ से कुछ शोर होना शुरू हुआ | शोर होना असामान्य घटना नहीं थी उस इलाके मैं पहाड़ पर अथवा जंगल से कुछ न कुछ आवाज़ें आती ही रहती थी | असामान्य घटना थी आवाज़ों का लगातार होते  रहना बंद न होना | सफ़ेद नरम बर्फ ने पूरी निर्दयता से कबीले को कुचल दिया था | ज्यादातर कबीले वासियों के लिए यह आखिरी रात थी | जहाँ कुदरत निर्दयता पूर्ण अंत करती है वही कोमल शुरुआत की गुंजाईश बनाये रखती है | कबीले मैं भी प्रकृति ने खुद को दोहराया जहाँ अधिकांश कबीलेवासो हमेशा के लिए सो गए कुछ नन्हे बचे सुरक्षित भी रहे |

नवरंग अपने तीन मित्रों के साथ सुरक्षित था | परन्तु जो इलाक़ा कबीले वासियों के लिए आरामदायक था अब एक मुश्किल प्रदेश मैं बदल गया था | नदी ने अपना रास्ता बदल लिया था अथवा वह समाप्त हो गयी थी इसका अर्थ थे की नवरंग एवं  उसके मित्रों के पास पानी नहीं था | उनका खाद्य भंडार कबीले के साथ ही नष्ट हो गया था | जंगल के किनारे पर उगे हुए पेड़ो से फल वगैरह मिल सकते थे परन्तु कबीले का जड़ी बूटी ज्ञान सिर्फ उतना ही बच पाया था जितना की बच्चों को जानकारी थी | जंगल के शुरुआती भाग मैं कई प्रजातियों के छोटे छोटे सांप पाए जाते थे इसी कारण कबीलेवासियों का साँपों के प्रति ज्ञान बहुत विस्तृत था और बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा मैं सर्प ज्ञान दिया जाता था | लिहाज़ा कबीले का जड़ी बूटी ज्ञान लगभग समाप्त होने के बावजूद भी सर्प ज्ञान सुरक्षित था |  जंगल के अंदर भयानक जानवर थे और खुले मैदान मैं सर्दी की अधिकता नवरंग एवं मित्रों के लिए घातक थी | अभी तक नवरंग का नायकत्व सिर्फ खेल के मैदान तक ही सीमित थे परन्तु अब नायकत्व को जीवन के अन्य क्षेत्रों तक विस्तृत करने के अलावा और कोई उपाय नहीं था | नवरंग के तीनो दोस्त नवरंग के दृढ़  नायकत्व  से ही जीवित रह सकते थे | नवरंग को प्रकृति के खिलाफ लड़ना ही था | दिन का वक़्त नवरंग और उसके दोस्तों के लिए सुरक्षित था परन्तु आने वाली रात्रि उनको मार सकती थी |

यदि नवरंग कबीले मैं सुनी कहानियों पर यकीन करे तो उसे बहुत अच्छी तरह पता था की नदी के विपरीत दिशा मैं चलने पर अन्य कबीले से मुलाकात हो सकती है परन्तु वह कबीले इतनी दूर थे की उन तक पहुँच पाना मुमकिन नहीं था | नदी की तरफ अथवा बर्फ की तरफ कुछ नहीं था जंगल मैं भयानक जानवर मौजूद थे | चारों दिशाएं ही मृत्यु की तरफ जाती थी और किस तरह की मौत का स्वागत किया जाये यह निर्णय नवरंग को करना था |

नवरंग ने जंगल मैं दाखिल होने का निर्णय किया | जंगल मैं खाने की कमी नहीं थी और उम्मीद की जा सकती थी की किसी गुफा मैं सुरक्षित भी रहा जा सकता था | इसके अलावा जंगल से एक अन्य फायदा भी था जंगल मैं छोटे बड़े कई तरह के जानवर थे और नवरंग के पास शिकार सीखने के लिए अवसर भी |  सूरज  के  उदय  होने  के  काफी पश्चात्  नवरंग अपने तीनो दोस्तों के साथ जंगल मैं दाखिल हो चुका था |

अभी सूरज आकाश के बीचोंबीच चमक रहा था परन्तु जैसे जैसे नवरंग जंगल मैं आगे बाद रहे थे सूर्य की किरणें ज़मीन पर पहुँचने से इंकार करने लगी | चारों तरफ अंधकार का साम्राज्य था नवरंग धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था | जंगल के शुरुआती हिस्से मैं उन लोगों को कुछ फलों के अलावा और कुछ नहीं मिल पाया जिसे उन्होंने अपने पास इकट्ठा कर लिया | धीरे धीरे जंगल फलों के साथ साथ सांप भी दिखाई देने लगे | नवरंग का कबीले साँपों को पालते थे इसीलिए नवरंग को उनसे कोई परेशानी नहीं थी | परन्तु इस इलाके मैं साँपों की जितनी प्रजातियाँ दिख रही थी उतनी प्रजातियों से नवरंग का परिचय नहीं था | फिर भी माहौल दोस्ताना प्रतीत हो रहा था | समस्या साँपों से नहीं बल्कि अंधेरे से हो रही थी | अंधेरे का समाधान पेड़ों के नीचे  नहीं मिल सकता था इसके लिए आवश्यक था की पेड़ो के झुरमुट से बहार निकल कर किसी ऊँची जगह की तरफ जाया जाये | चारों तरफ की ज़मीन उबड़ खाबड़ थी और ऊंचाई की दिशा पता लगाना आसान नहीं था | परन्तु नवरंग को यह करना ही था उसे खुद को सुरक्षित करना ही था |

अभी तक नवरंग का सामना साँपों से ही हुआ था परन्तु नवरंग जंगल मैं बसने वाले अजीबो गरीब जानवरों की कहानियां सुनते हुए बड़ा हुआ था | किसी ने भी किस्से कहानियों के जानवरों को साक्षात् नहीं देखा था परन्तु क्या हो यही वह सारे जानवर वास्तव मैं हो ?

नवरंग अनुमान से ही ऊँची जगह की तलाश मैं कभी इधर कभी उधर भटकता रहा और आखिर मैं एक ऐसे स्थान को पा गया जोकि अधिक ऊंचाई पर तो नहीं था परन्तु यहाँ पर पेड़ों की संख्या बहुत कम थी इसीलिए रोशनी काफी अधिक थी | यह जगह एक छोटे से समतल अनघड़ मैदान के रूप मैं थी | इस मैदान के एक तरफ एक ऊँची दीवार जैसा कुछ था और दूसरी तरफ एक बहुत गहरी खाई जैसा कुछ था और मैदान के अंत मैं गुफा दिखाई दे रही थी |

गुफा के आस पास का माहौल गवाही दे रहा था की यहाँ  कोई नहीं रहता और इसे सुरक्षित मन जा सकता है | नवरंग और मित्रों ने आसपास का बहुत बारीकी से निरीक्षण के बाद निश्चय किया की कम से कम आज रात यहां गुजारी जा सकती है |

फल नवरंग के पास थे और पानी नज़दीक से ही मिल गया | आग जलने का इंतज़ाम भी कर लिया गया था गुफा का मुँह कुछ झाड़ियों से धक् दिया गया था | गुफा बहुत लम्बी और अँधेरी थी परन्तु नावरण एवं दोस्तों ने गुफा के दूसरे सिरे पर भी झाडिया रख कर बंद कर दिया था | इस तरह गुफा बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित थी | इसके बावजूद रात्रि विश्राम के दौरान बारी बारी से जागकर पहरा देने का निश्चय किया गया |

रात का आखिरी पहर था जब नवरंग अपनी पहरे की ड्यूटी को निभा रहा था | गुफा के बहार सफेद धुंध इकट्ठी हो रही थी | पहाड़ी इलाके मैं धुंध कोई नयी चीज़ नहीं थी और न ही नवरंग को उसकी चिंता थी | नवरंग लगातार धुंध  पार देखने की कोशिश कर रहा था |  हलाकि अंधेरा था फिर भी धुंध के पार पेड़ बहुत हलकी छाया के रूप मैं दिखाई पद रहे थे जोकि नवरंग को आश्चर्य चकित कर रहे थे | गुफा ने नज़दीकी भाग मैं कोई पेड़ नहीं था और घनी धुंध के आर पार दूर के पेड़ दिखाई देना आश्चर्यजनक था | आखिर जब नवरंग अपनी उत्सुकता नहीं दबा पाया तो वह झाडिया साइड मैं करके धुंध मैं दाखिल हो गया | कुछ कदम चलने पर ही नवरंग धुंध से बाहर आ गया | यह आश्चर्य जनक था | नवरंग ने ऐसी धुंध कभी नहीं देखी थी जो सिर्फ एक छोटे से एरिया मैं फैली हो | परन्तु नवरंग जनता था की यह धुंध खतरनाक नहीं है थोड़ी देर पहले ही वह इस धुंध के आर पार आया था | नवरंग दोबारा धुंध मैं दाखिल हो गया परन्तु इस बार वह धुंध से बाहर नहीं आ सका धुंध पूरी गुफा मैं फ़ैल चुकी थी | नवरंग डर गया था उसने अंदाज़ से अपने दोस्तों को जगाया और सबके साथ बहार के खुले मैदान मैं आ गया जहां पर धुंध नहीं थी | बाकि रात सभी दोस्तों ने बहार ही बिता दी

अगली सुबह सभी दोस्त चारों तरफ फ़ैल गए एक ऐसे जगह की त्तलाश मैं जोकि सुरक्षित हो साथ ही सभी जरूरी वस्तुएँ भी उपलब्ध करवाती हो | गुफा के अलावा ऐसी कोई जगह तलाश नहीं की जा सकी लिहाज़ा आज की रात भी गुफा मैं ही गुजारनी थी | गुफा सुरक्षित थी परन्तु रहस्मयी धुंध की चिंता सभी को थी |

रात आयी और गुजरती रात के साथ रहस्मयी धुंध भी आयी परन्तु धुंध गुफा के अंदर नहीं जा सकी | जिससे नवरंग खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगा | कई रातें इसी तरह गुजर गयी धुंध हर रात थी परन्तु गुफा के बाहर | धीरे धीरे सभी दोस्त धुंध के बारे मैं निश्चित हो गए | उन्होंने अपने रहने के लिए गुफा को आरामदायक  एवं  सुरक्षित बनाना शुरू कर दिया |

गुफा फिलहाल सुरक्षित थी परन्तु गुफा का अंतिम सिरा अँधेरे मैं डूबा हुआ एवं अनजाना था |