Change With Changing Society

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Change With Changing Society

 

 

Indian society & its beliefs are good or bad, this question may be personal. People with their argument may prove it is very bad, even worse, at the same time people may prove it is so good that no other society stands in front.

As I said it is personal so I won’t be talking about the society as a whole. But I would like to comment on a particular relation ‘marriage’.

Marriage may be a very important relation here in India, even so important that society doesn’t believe a man is settled if he is unmarried. Even in some cases unmarried men are believed to be bad men. Unmarried men face difficulties if he is looking for a rented house. But is this true ? Same may apply for women too.

Well I am not talking about if unmarried men are really bad or good, but my point is if marriage is a part of society, breaking marriage also should be part of the same society. In the past it was not accepted in hindu culture, but with changing time hindu culture or more precisely many believers of hindu culture not ready to change without knowing or may be intentionally ignoring the consequence.

Here is a small story circulating in social media, which shows how many people just want to ignore the change. Read the story then I will share 2 real stories to clear the outcome.

 

 

रविवार को फुरसत से…..

तब मैं जनसत्ता में नौकरी करता था। एक दिन खबर आई कि एक आदमी ने झगड़ा के बाद अपनी पत्नी की हत्या कर दी। मैंने खब़र में हेडिंग लगाई कि पति ने अपनी बीवी को मार डाला। खबर छप गई। किसी को आपत्ति नहीं थी। पर शाम को दफ्तर से घर के लिए निकलते हुए प्रधान संपादक प्रभाष जोशी जी सीढ़ी के पास मिल गए। मैंने उन्हें नमस्कार किया तो कहने लगे कि संजय जी, पति की बीवी नहीं होती।

“पति की बीवी नहीं होती?” मैं चौंका था।

“बीवी तो शौहर की होती है, मियां की होती है। पति की तो पत्नी होती है।”

भाषा के मामले में प्रभाष जी के सामने मेरा टिकना मुमकिन नहीं था। हालांकि मैं कहना चाह रहा था कि भाव तो साफ है न ? बीवी कहें या पत्नी या फिर वाइफ, सब एक ही तो हैं। लेकिन मेरे कहने से पहले ही उन्होंने मुझसे कहा कि भाव अपनी जगह है, शब्द अपनी जगह। कुछ शब्द कुछ जगहों के लिए बने ही नहीं होते, ऐसे में शब्दों का घालमेल गड़बड़ी पैदा करता है।

प्रभाष जी आमतौर पर उपसंपादकों से लंबी बातें नहीं किया करते थे। लेकिन उस दिन उन्होंने मुझे टोका था और तब से मेरे मन में ये बात बैठ गई थी कि शब्द बहुत सोच समझ कर गढ़े गए होते हैं।

खैर, आज मैं भाषा की कक्षा लगाने नहीं आया। आज मैं रिश्तों के एक अलग अध्याय को जीने के लिए आपके पास आया हूं। लेकिन इसके लिए आपको मेरे साथ निधि के पास चलना होगा।

निधि मेरी दोस्त है। कल उसने मुझे फोन करके अपने घर बुलाया था। फोन पर उसकी आवाज़ से मेरे मन में खटका हो चुका था कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। मैं शाम को उसके घर पहुंचा। उसने चाय बनाई और मुझसे बात करने लगी। पहले तो इधर–उधर की बातें हुईं, फिर उसने कहना शुरू कर दिया कि नितिन से उसकी नहीं बन रही और उसने उसे तलाक देने का फैसला कर लिया है।

मैंने पूछा कि नितिन कहां है, तो उसने कहा कि अभी कहीं गए हैं, बता कर नहीं गए। उसने कहा कि बात–बात पर झगड़ा होता है और अब ये झगड़ा बहुत बढ़ गया है। ऐसे में अब एक ही रास्ता बचा है कि अलग हो जाएं, तलाक ले लें।

मैं चुपचाप बैठा रहा।

निधि जब काफी देर बोल चुकी तो मैंने उससे कहा कि तुम नितिन को फोन करो और घर बुलाओ, कहो कि संजय सिन्हा आए हैं।

निधि ने कहा कि उनकी तो बातचीत नहीं होती, फिर वो फोन कैसे करे?

अज़ीब संकट था। निधि को मैं बहुत पहले से जानता हूं। मैं जानता हूं कि नितिन से शादी करने के लिए उसने घर में कितना संघर्ष किया था। बहुत मुश्किल से दोनों के घर वाले राज़ी हुए थे, फिर धूमधाम से शादी हुई थी। ढेर सारी रस्म पूरी की गईं थीं। ऐसा लगता था कि ये जोड़ी ऊपर से बन कर आई है। पर शादी के कुछ ही साल बाद दोनों के बीच झगड़े होने लगे। दोनों एक–दूसरे को खरी–खोटी सुनाने लगे। और आज उसी का नतीज़ा था कि संजय सिन्हा निधि के सामने बैठे थे, उनके बीच के टूटते रिश्तों को बचाने के लिए।

खैर, निधि ने फोन नहीं किया। मैंने ही फोन किया और पूछा कि तुम कहां हो ? मैं तुम्हारे घर पर हूं, आ जाओ। नितिन पहले तो आनाकानी करता रहा, पर वो जल्दी ही मान गया और घर चला आया।

अब दोनों के चेहरों पर तनातनी साफ नज़र आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि कभी दो जिस्म–एक जान कहे जाने वाले ये पति–पत्नी आंखों ही आंखों में एक दूसरे की जान ले लेंगे। दोनों के बीच कई दिनों से बातचीत नहीं हुई थी।

नितिन मेरे सामने बैठा था। मैंने उससे कहा कि सुना है कि तुम निधि से तलाक लेना चाहते हो?

उसने कहा, “हां, बिल्कुल सही सुना है। अब हम साथ नहीं रह सकते।”

मैंने कहा कि तुम चाहो तो अलग रह सकते हो। पर तलाक नहीं ले सकते।

“क्यों?”

“क्योंकि तुमने निकाह तो किया ही नहीं है।”

“अरे यार, हमने शादी तो की है।”

“हां, शादी की है। शादी में पति–पत्नी के बीच इस तरह अलग होने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर तुमने मैरिज़ की होती तो तुम डाइवोर्स ले सकते थे। अगर तुमने निकाह किया होता तो तुम तलाक ले सकते थे। लेकिन क्योंकि तुमने शादी की है, इसका मतलब ये हुआ कि हिंदू धर्म और हिंदी में कहीं भी पति–पत्नी के एक हो जाने के बाद अलग होने का कोई प्रावधान है ही नहीं।”

मैंने इतनी–सी बात पूरी गंभीरता से कही थी, पर दोनों हंस पड़े थे। दोनों को साथ–साथ हंसते देख कर मुझे बहुत खुशी हुई थी। मैंने समझ लिया था कि रिश्तों पर पड़ी बर्फ अब पिघलने लगी है। वो हंसे, लेकिन मैं गंभीर बना रहा।

मैंने फिर निधि से पूछा कि ये तुम्हारे कौन हैं?

निधि ने नज़रे झुका कर कहा कि पति हैं। मैंने यही सवाल नितिन से किया कि ये तुम्हारी कौन हैं? उसने भी नज़रें इधर–उधर घुमाते हुए कहा कि बीवी हैं।

मैंने तुरंत टोका। ये तुम्हारी बीवी नहीं हैं। ये तुम्हारी बीवी इसलिए नहीं हैं क्योंकि तुम इनके शौहर नहीं। तुम इनके शौहर नहीं, क्योंकि तुमने इनसे साथ निकाह नहीं किया। तुमने शादी की है। शादी के बाद ये तुम्हारी पत्नी हुईं। हमारे यहां जोड़ी ऊपर से बन कर आती है। तुम भले सोचो कि शादी तुमने की है, पर ये सत्य नहीं है। तुम शादी का एलबम निकाल कर लाओ, मैं सबकुछ अभी इसी वक्त साबित कर दूंगा।

बात अलग दिशा में चल पड़ी थी। मेरे एक–दो बार कहने के बाद निधि शादी का एलबम निकाल लाई। अब तक माहौल थोड़ा ठंडा हो चुका था, एलबम लाते हुए उसने कहा कि कॉफी बना कर लाती हूं।

मैंने कहा कि अभी बैठो, इन तस्वीरों को देखो। कई तस्वीरों को देखते हुए मेरी निगाह एक तस्वीर पर गई जहां निधि और नितिन शादी के जोड़े में बैठे थे और पांव पूजन की रस्म चल रही थी। मैंने वो तस्वीर एलबम से निकाली और उनसे कहा कि इस तस्वीर को गौर से देखो।

उन्होंने तस्वीर देखी और साथ–साथ पूछ बैठे कि इसमें खास क्या है?

मैंने कहा कि ये पैर पूजन का रस्म है। तुम दोनों इन सभी लोगों से छोटे हो, जो तुम्हारे पांव छू रहे हैं।

“हां तो?”

“ये एक रस्म है। ऐसी रस्म संसार के किसी धर्म में नहीं होती जहां छोटों के पांव बड़े छूते हों। लेकिन हमारे यहां शादी को ईश्वरीय विधान माना गया है, इसलिए ऐसा माना जाता है कि शादी के दिन पति–पत्नी दोनों विष्णु और लक्ष्मी के रूप हो जाते हैं। दोनों के भीतर ईश्वर का निवास हो जाता है। अब तुम दोनों खुद सोचो कि क्या हज़ारों–लाखों साल से विष्णु और लक्ष्मी कभी अलग हुए हैं? दोनों के बीच कभी झिकझिक हुई भी हो तो क्या कभी तुम सोच सकते हो कि दोनों अलग हो जाएंगे? नहीं होंगे। हमारे यहां इस रिश्ते में ये प्रावधान है ही नहीं। तलाक शब्द हमारा नहीं है। डाइवोर्स शब्द भी हमारा नहीं है

यहीं दोनों से मैंने ये भी पूछा कि बताओ कि हिंदी में तलाक को क्या कहते हैं?

दोनों मेरी ओर देखने लगे। उनके पास कोई जवाब था ही नहीं। फिर मैंने ही कहा कि दरअसल हिंदी में तलाक का कोई विकल्प नहीं। हमारे यहां तो ऐसा माना जाता है कि एक बार एक हो गए तो कई जन्मों के लिए एक हो गए। तो प्लीज़ जो हो ही नहीं सकता, उसे करने की कोशिश भी मत करो। या फिर पहले एक दूसरे से निकाह कर लो, फिर तलाक ले लेना।”

अब तक रिश्तों पर जमी बर्फ काफी पिघल चुकी थी।

निधि चुपचाप मेरी बातें सुन रही थी। फिर उसने कहा कि

भैया, मैं कॉफी लेकर आती हूं।

वो कॉफी लाने गई, मैंने नितिन से बातें शुरू कर दीं। बहुत जल्दी पता चल गया कि बहुत ही छोटी–छोटी बातें हैं, बहुत ही छोटी–छोटी इच्छाएं हैं, जिनकी वज़ह से झगड़े हो रहे हैं।

खैर, कॉफी आई। मैंने एक चम्मच चीनी अपने कप में डाली। नितिन के कप में चीनी डाल ही रहा था कि निधि ने रोक लिया, “भैया इन्हें शुगर है। चीनी नहीं लेंगे।”

लो जी, घंटा भर पहले ये इनसे अलग होने की सोच रही थीं और अब इनके स्वास्थ्य की सोच रही हैं।

मैं हंस पड़ा। मुझे हंसते देख निधि थोड़ा झेंपी। कॉफी पी कर मैंने कहा कि अब तुम लोग अलगे हफ़्ते निकाह कर लो, फिर तलाक में मैं तुम दोनों की मदद करूंगा।

शायद अब दोनों समझ चुके थे।

*हिंदी एक भाषा ही नहीं संस्कृति है।*

*व हिंदु धर्म ही नही सभ्यता है।*

–एक पत्रकार

 

Now come to the point. This story is not real but it is for teaching that there is no option for the divorce if you are Hindu. Today all hindu marriages are registered under Hindu Marriage Act (HMA), and HMA provides options for the divorce under section 13. There are two main options :

HMA 13A : If one partner misbehaves which comes under the definition of cruelty, the other partner may ask for divorce.

HMA 13B : Under this section even if there is no cruelty still both partners feel they can’t stay together they can ask for divorve by mutual agreement. (although this is not the exact explanation of mutual agreement but it gives a broad idea)

So the story is just ignoring the legal facts. Ok people can argue that the story is not for legal but for emotional. Still I disagree because ‘what we need to teach our kids’ is more important than what ‘we are teaching’. In the past life was mostly about raising a family, but for the coming generation life is much more than just raising a family, it is not possible that they can stay in a family life for a long time. Both the partners may have different nature, different aim for life and they may not be able to stay together. In that case it will be more useful to teach them that marriage may break and be ready for that. If we are not teaching the same we may be spoiling their life.

How ?

I can explain this with these real stories.

STORY 1 – Mr A & Ms B (no kid). Mr A & Ms B married around 12 year back. The marriage didn’t work and within 2 month Ms B left. But Ms B was not ready to accept that marriage didn’t work so when Mr A asked for divorce, Ms B dragged the entire family and relatives of Mr B for more then 11 year in police station and courts. Mr. A wasted his 10+ years in proving that it is just a marriage that didn’t worked which Ms. B claimed as dowry & domestic violence. Now after 10+ years Mr A finally proved that allegations by Ms B were false, Mr A is finally free. But now Mr A is at the stage of life where his only aim is to destroy the entire life of Ms B, he doesn’t want anything less than that from life. At Least Two (there may be more because now Mr A is in a different type of fight) lives are wasted just because Ms B was not ready for the changing society.

STORY 2 – Mr S & Ms C (no kid). S & C has been married for the past 4 year. So far somehow life was going on, not smoothly but it was going on. After 3 year ms C decided to come out of marriage. But Mr S was not ready because in his entire family no one has taken divorce. And he thinks divorce is a very bad thing. Ms C asked for mutual divorce, but Mr S thinks divorce is bad, so he didn’t agree. When Mr S called me I tried to tell him that divorce is not a bad thing, just let her go, but he did not agree at any cost. Finally Ms C filed divorce in section 13A with a lot of allegations, also she filed dowry and domestic violence complaints with multiple maintenance cases. Now Mr S is running from one to another court, he is suspended from his govt job, his parents are also facing problems. It all happens just because Mr S is not ready to accept the divorce because he didn’t get the right education for changing society.

These two stories are real stories and used for sharing why the acceptance of change is important. If parents are not teaching their kids ‘what they need to know’ and they continue ‘what they are teaching’ it may spoil their kids’ entire life.

Choice is limited.

 

Either teach your kid to be ready for the change or They may spoil their own Life.

 

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