फर्स्ट अप्रैल

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फर्स्ट अप्रैल

अनाम

 

फर्स्ट अप्रैल हमेशा से ही सावधानी के साथ गुजरना मेरी आदत रही है । आज भी कुछ वैसा ही किया , और शाम तक सब ठीक भी रहा । उसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि अब सोच रहा हूँ कि घर जाऊं या किसी होटल में रात गुजार दूं ।

अभी शाम का अंधेरा शुरू ही हुआ था कि बुधिया शराब की बोतल और साथ में बढ़िया मुर्गा लेकर आ पहुंचा । एक बार तो सोचा कि सावधान रहना चाहिए पर मुर्गे की खुश्बू मजबूर कर गयी । बस मुर्गे के कारण पेग से पेग टकरा दिए ।

धीरे धीरे शराब चढ़ने लगी और बुधिया खुलने लगा । आज वो बहुत खुश था ।

बुधिया की शादी को आज सात साल हो गए थे और इन सात सालों में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरा हो जब बुधिया और उसकी पत्नी में झगड़ा ना हुआ हो । रोज रोज के इन झगड़ों से बुधिया कुछ टूट सा गया उसने खुश रहना छोड़ ही दिया ।

आज बुधिया बहुत खुश था, किसी ने उसे बता दिया था कि अब वो कैद से आजाद है क्योंकि उस पर दहेज़ का मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता क्योंकि सात वर्ष बाद दहेज के मुकदमा प्रभावी नहीं रहता । वो अब ईंट का जवाब पत्थर से दे सकता है ।

एक बार बुधिया का चेहरा देखने के बाद मैंने भी अपना ज्ञान भगार दिया । मैन उसे बता दिया कि उसे किसी ने फर्स्ट अप्रैल के कारण मूर्ख बना दिया वो आज भी उतना ही कैदी है और मृत्यु तक रहेगा , क्योंकि दहेज के मुकदमा मृत्यु तक प्रभावी रहता है ।

अब बुधिया कह रहा है कि मैं उसका दुश्मन हूँ मुझे उसकी खुशी बर्दाश्त नहीं होती इसीलिए आज वो मेरी टंगे तोड़े बगैर नहीं छोड़ेगा ।

अब क्या करूं , कहाँ जाऊं ?