My Choice

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My Choice

सुमन : पहले यह बताओ कि चाय बनाऊं या कॉफी
नीलम : छोड़ी फिर कभी बैठो आराम से और यह बताओ कि तुम्हारे पास तो बड़ा सा बंगला था फिर यह किराए का मकान … क्या हुआ
सुमन : बुढऊ मरते मरते हमारा बंगला समाज सेवी संस्था को पुस्तकालय बनाने के लिए दे गया और हमारी बैंड बजा गया
नीलम : बढ़िया तुम्हारे ससुर टीचर थे उनको पढ़ना अच्छा लगता है शायद इसीलिए पुस्तकालय बना गए
सुमन : बुढऊ मुझसे नफरत करता था और मुझे सबक सिखाने के लिए दान कर गया
नीलम : वो कैसे
सुमन : मेरा मेरी पसंद के काम करना उसको पसंद नहीं था और मैन उसके हिसाब से चलना मंजूर नहीं किया
नीलम : तो My Choice का मामला है
सुमन : बिल्कुल
नीलम : फिर तो तुम्हे नाराज़ होने का या उन्हें बुढऊ कहने का कोई हक नहीं बनता बल्कि तुम्हे उनकी इज़्ज़त करनी चाहिए
सुमन : वो किस लिए
नीलम : तुम्हारा My Choice का मॉडल अधूरा है जब तक My Choice तुमने इस्तेमाल किया तुम्हे आपत्ति नहीं वही My Choice जब तुम्हारे ससुर ने इस्तेमाल किया तब तुम्हे आपत्ति है
सुमन : बंगले पर हमारा हक था उसे वो ऐसे कैसे दे सकता था
नीलम : क्या तुम कोर्ट गयी थी
सुमन : हा परंतु बात नहीं बनी
नीलम : बात नहीं बनी क्योंकि तुम्हारा बंगले पर कोई कानूनी हक नहीं था
सुमन : सामाजिक हक तो हमारा ही था
नीलम : तुम्हारे ससुर ने तुम्हारे पति को पढ़ा लिखा दिया नौकरी लग गयी हर जिमेदारी पूरी कर दी इसके बाद जहां तक सामाजिक हक है वो सिर्फ कह देने से पैदा नहीं होता । मेरी नज़र में तो उन्होंने सिर्फ वही किया जो उनकी नज़र में उचित था । My Choice किसी एक के लिए नहीं हो सकती यह तो सब पर लागू होना चाहिए या फिर किसी पर भी नहीं
नीलम : अच्छा छोड़ो इस बात को और यह बताओ कि तुम्हारी लड़की बड़ी हो गया है और मुझे एक मॉडल की तलाश है
सुमन : नहीं मॉडलिंग बेकार का काम है
नीलम : हो सकता है परंतु मेंतुम्हारी लड़की के बारे में बात कर रही हूँ। उससे बात कर लो
सुमन : वो IAS बनेगी
नीलम : तो तुम्हारी My Choice सिर्फ खुद तक सीमित है लड़की तक भी नहीं पहुंचती ??